Friday, February 11, 2011

ब्रिटेन में पारंपरिक भारतीय कुश्ती से जरूरतमंदों की मदद


भारत के लोकप्रिय खेल कबड्डी के बाद अब भारतीय स्टाइल की देसी कुश्ती भी ब्रिटेन में अपने पांव जमा रही है। ब्रिटिश सेना के जवान और पुलिसकर्मी पिछले कुछ सालों से कबड्डी में खूब दिलचस्पी ले रहे हैं। मगर अब उत्तरी इंग्लैंड के ओल्डहैम में भारतीय पारंपरिक कुश्ती अपना रंग जमाने के लिए तैयार है। 22 फरवरी से यहां पहली बार कुश्ती की प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। इस आयोजन के जरिए पहलवान चैरिटी संस्थाओं के लिए धन जुटाएंगे ताकि बांग्लादेश में जरूरतमंदों और गरीबों को प्राथमिक चिकित्सा मुहैया कराई जा सके। कबड्डी, कुश्ती और खो-खो जैसे खेल ब्रिटेन में भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रवासियों ने शुरू किए हैं। अब इन्हें यहां के लोगों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। खासतौर पर एशियाई मूल के लोगों के बहुतायत वाले कस्बों में ये खेल काफी प्रचलित हो चुके हैं। ब्रिटिश सेना की कबड्डी टीम तो पंजाब और भारत के अन्य कुछ राज्यों का दौरा भी कर चुकी है। भारतीय दौरे पर आकर कबड्डी खेल चुके सार्जेट स्कॉट बुरैल कहते हैं यह ऐसा खेल है जिसके लिए किसी उपकरण की जरूरत नहीं होती। इसे दुनिया में कहीं भी छोटे से मैदान पर खेला जा सकता है। स्कॉट ब्रिटिश सेना के शारीरिक प्रशिक्षण दस्ते के सदस्य हैं। वह कहते हैं कि हमारे जवान चाहे जहां भी हों, अफगानिस्तान में या इराक में, इसे खेल सकते हैं। ओल्डहैम में होने वाली अमेचर कुश्ती प्रतियोगिता ताज पैलेस में आयोजित की जाएगी। बीबीसी के लोकप्रिय कार्यक्रम लास्ट मैन स्टैंडिंग को देखने के बाद प्रोत्साहित हुए नानु मियाह इस प्रतियोगिता को आयोजित करा रहे हैं। बीबीसी के कार्यक्रम में विदेशी लोगों का दल आदिवासी इलाकों की चुनौतियों का सामना करता है। नानू कहते हैं कि ज्यादातर लोगों ने देसी कुश्ती के बारे में ज्यादा नहीं सुना है। ना ही वह यह जानते कि इसका जन्म कहां हुआ। उन्होंने कहा कि वह बांग्लादेश में जरूरतमंदों और गरीबों को चिकित्सकीय सेवा उपलब्ध कराने के लिए धन जुटाना चाहते हैं। वहां लोगों के इलाज में ज्यादा पैसा खर्च नहीं होता है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में आठ प्रतियोगी होंगे जो लास्ट मैन स्टैंडिंग का खिताब जीतने के लिए दो-दो हाथ करेंगे।


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